बुजुर्ग महिला रीता भसीन के बाद रिटायर्ड डीआईजी भी जालसाजों के निशाने पर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस भले ही नामचीन अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज रही हो, लेकिन साइबर अपराधियों की चुनौती अब भी कायम है। इंटरनेट और मोबाइल तकनीक के जरिए ATM क्लोनिंग, डिजिटल अरेस्ट, फेक कॉल और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड जैसे अपराध खुलेआम हो रहे हैं।
हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल गिरोह का भंडाफोड़ कर पुलिस ने भले ही राहत की सांस ली हो, लेकिन आम लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई न होने से ऐसे अपराधियों का हौसला और बढ़ रहा है।
🔴 ठगी की ताजा वारदातें:
👉 23 जुलाई 2025: वोट्स गेमिंग वेबसाइट के जरिए करोड़ों की ठगी। गिरोह के 16 साइबर अपराधी गिरफ्तार।
👉 25 जुलाई 2025: ‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह का खुलासा। रीता भसीन से 56 लाख रुपए की ठगी।
👉 अब नया मामला: एक रिटायर्ड डीआईजी व एक रिटायर्ड बैंक कैशियर को निशाना बनाकर 10 लाख की ठगी।
शातिर दिमाग, मासूम लालच
साइबर ठग आमजन की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं — जैसे जल्द अमीर बनने का सपना, विलासिता की लालसा और बिना मेहनत सबकुछ पा लेने की चाहत। यही कारण है कि राजधानीवासियों का लालच ही अब उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुका है।
⚠️ सावधान रहें, सतर्क बनें!
कोई भी खुद को CBI या पुलिस अफसर बताकर पैसे मांगे, तो तुरंत स्थानीय थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर संपर्क करें।
फर्जी ऐप्स और वेबसाइट्स से दूर रहें।
ओटीपी या बैंक जानकारी किसी से साझा न करें।
सरकार और साइबर सेल को चाहिए कि आमजन की शिकायतों को प्राथमिकता दें, ताकि अपराधियों का मनोबल टूटे और जनता को न्याय मिले।