ब्यूरो चीफ आनंद कुमार
चहनियां (चंदौली): सरकार एक तरफ ‘नौनिहालों के बेहतर भविष्य’ और ‘डिजिटल इंडिया’ का दम भर रही है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर सरकारी मशीनरी की लापरवाही योजनाओं को पलीता लगा रही है। ताज़ा मामला चहनियां ब्लॉक के खंडवारी ग्राम सभा का है, जहाँ आंगनवाड़ी भवन का निर्माण कार्य वर्षों से अधर में लटका हुआ है। कागजों में ‘विकास’, ज़मीन पर ‘विनाश’ ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस भवन के लिए शासन से पर्याप्त बजट पास किया जा चुका है। बावजूद इसके, निर्माण स्थल पर आज भी सन्नाटा पसरा है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ अब तक एक मज़बूत पिलर खड़ा हो जाना चाहिए था, वहाँ केवल अधूरा ढांचा विभागीय उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है। ग्रामीणों की मानें तो सरकारी रिकॉर्ड में कार्य को गतिमान या पूर्ण दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। ग्रामीणों में गहरा आक्रोश खंडवारी के स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि: बजट का बंदरबांट: पैसा पास होने के बाद भी काम क्यों रुका है? यह जांच का विषय है। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: भवन न होने के कारण छोटे बच्चों को अन्य जगहों पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी शिक्षा और पोषण योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। जवाबदेही का अभाव: बार-बार शिकायत के बाद भी न तो संबंधित ठेकेदार और न ही जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे हैं। मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं: आखिर पास हुआ बजट गया कहाँ? क्या उच्चाधिकारियों ने कभी मौके पर जाकर सत्यापन करने की जहमत उठाई? अधूरे निर्माण के जिम्मेदार लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “यह सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य का सवाल है। अगर जल्द ही निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो हम आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।” — स्थानीय ग्रामीण निष्कर्ष: खंडवारी में रुका हुआ यह निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस खबर का संज्ञान लेकर कब तक जांच बैठाता है और कब खंडवारी के बच्चों को उनका अपना आंगनवाड़ी भवन नसीब होता है।