लखनऊ: माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए घटनाक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता।”
सीएम योगी ने कहा कि भारत एक संवैधानिक व्यवस्था से संचालित देश है और यहां हर नागरिक को कानून का पालन करना अनिवार्य है।
“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता”
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा:
“हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर जहां-तहां वातावरण खराब नहीं किया जा सकता। हम भारत की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े लोग हैं और मेरा मानना है कि भारत के हर नागरिक को कानून मानना चाहिए।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि धार्मिक पदों और परंपराओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी को भी व्यवस्था के विरुद्ध जाकर माहौल बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
वाराणसी की घटना का भी जिक्र
सीएम योगी ने बयान के दौरान Avimukteshwaranand Saraswati का नाम लिए बिना कहा कि
“अगर वह शंकराचार्य थे, तो सपा वालों ने वाराणसी में उनके ऊपर लाठी क्यों चलवाई थी?”
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर विपक्षी दल Samajwadi Party पर निशाना है।
वीडियो में उठाए गए गंभीर मुद्दे
मुख्यमंत्री के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने धार्मिक पदों की गरिमा, कानून व्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे कई गंभीर मुद्दों पर विस्तार से बात की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
फिलहाल, माघ मेले की इस घटना और मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सियासी और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चाएं जारी हैं।