लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर अब विराम लग गया है। बीते कुछ समय से यह चर्चा तेज थी कि पंचायत चुनावों को टाला जा सकता है, लेकिन प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इन सभी कयासों को खारिज कर दिया है। मंत्री ने साफ कहा है कि पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर कराए जाएंगे और यह प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से पहले पूरी होगी।
मंत्री के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों की उलटी गिनती अब शुरू हो चुकी है और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं।
हर जिले में तैयारियां तेज, बैलेट पेपर पहुंचाए गए
ओम प्रकाश राजभर के मुताबिक सरकार पंचायत चुनाव को लेकर पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में चुनाव संबंधी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
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चुनाव के लिए जरूरी बैलेट पेपर पहले ही जिलों तक पहुंचा दिए गए हैं
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जिला प्रशासन को चुनाव संचालन से जुड़े निर्देश दिए जा चुके हैं
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मतदान की प्रक्रिया को समय पर संपन्न कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है
सरकार का फोकस इस बात पर है कि चुनाव प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी हो।
अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच हो सकता है मतदान
पंचायती राज मंत्री ने संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और जिला पंचायत सदस्यों के पदों पर मतदान कराया जाएगा।
राजभर ने दोहराया कि पंचायत चुनाव हर हाल में विधानसभा चुनाव से पहले कराए जाएंगे, जिससे स्थानीय निकायों में समय पर नई निर्वाचित इकाइयों का गठन किया जा सके।
28 मार्च को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर चल रहा पुनरीक्षण कार्य भी अपने अंतिम चरण में है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले ही अनंतिम (ड्राफ्ट) मतदाता सूची जारी कर दी थी, जिस पर प्राप्त आपत्तियों और दावों की जांच की जा रही है।
आयोग ने अब फैसला लिया है कि:
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मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 मार्च को किया जाएगा
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इसके बाद चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा संभव है
अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए समयसीमा बढ़ाई गई थी।
अफवाहों पर लगा ब्रेक
मतदाता सूची और आरक्षण प्रक्रिया में लग रहे समय के कारण सोशल मीडिया पर पंचायत चुनाव टलने की खबरें वायरल हो रही थीं। हालांकि सरकार के ताजा बयान के बाद यह साफ हो गया है कि ये सभी चर्चाएं बेबुनियाद थीं और चुनाव अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे।
ग्रामीण राजनीति के लिए अहम हैं पंचायत चुनाव
यूपी में पंचायत चुनावों को ग्रामीण राजनीति की रीढ़ माना जाता है। यही वजह है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल गांव स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। इन चुनावों के नतीजे आने वाले विधानसभा चुनावों के राजनीतिक संकेत भी देते हैं।