लखनऊ।
उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और सख्ती से लागू करते हुए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड न करने वाले 68,236 राज्य कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित कर्मचारी अपनी संपत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज नहीं करेंगे, तब तक उनकी सैलरी जारी नहीं की जाएगी।
मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अनिवार्य
राज्य सरकार द्वारा सभी कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा विवरण अपलोड करें। यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी सिस्टम में जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने संपत्ति का विवरण अपडेट नहीं किया, जिसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
68,236 कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिन कर्मचारियों ने अब तक संपत्ति का विवरण ऑनलाइन दर्ज नहीं किया है, उनकी संख्या 68,236 है। इन सभी कर्मचारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार का साफ संदेश
राज्य सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि
“जब तक कर्मचारी अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं करेंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा।”
सरकार ने यह भी साफ किया कि यह कार्रवाई किसी को दंडित करने के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए की गई है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
योगी सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाती रही है। संपत्ति विवरण को अनिवार्य करने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी कर्मचारियों की आय और संपत्ति में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी तरह की अनियमितता पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
कर्मचारियों को दी गई राहत की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, जिन कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई है, वे जैसे ही अपना संपत्ति विवरण पोर्टल पर अपडेट करेंगे, उनके वेतन को फिर से जारी कर दिया जाएगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रशासनिक स्तर पर सख्ती जारी
सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने अधीन कर्मचारियों को जल्द से जल्द संपत्ति विवरण अपडेट कराने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, आगे भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।