वाराणसी ने रचा इतिहास: चीन को पछाड़कर बनाया सर्वाधिक पौधरोपण का ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ - Iconic India News

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वाराणसी ने रचा इतिहास: चीन को पछाड़कर बनाया सर्वाधिक पौधरोपण का ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’

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वाराणसी/डोमरी:
धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी ने रविवार को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए गाँव डोमरी (सुजाबाद) में नगर निगम वाराणसी के नेतृत्व में आयोजित वृहद पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान महज एक घंटे में 2.5 लाख से अधिक पौधे लगाकर चीन के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया गया।
मियावाकी तकनीक से बना ‘ऑक्सीजन बैंक’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘ग्रीन सिटी-क्लीन सिटी’ के संकल्प को पूरा करना है। गंगा पार डोमरी के लगभग 350 बीघा क्षेत्र में मियावाकी विधि से एक सघन शहरी वन (Mini Forest) विकसित किया गया है। यह क्षेत्र आने वाले समय में काशी के लिए एक बड़े ‘ऑक्सीजन बैंक’ के रूप में काम करेगा।
एक घंटे में लक्ष्य हासिल, वर्ल्ड रिकॉर्ड टीम रही मौजूद
इस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत सुबह 9:11 बजे हुई और ठीक 10:11 बजे तक 2.5 लाख से अधिक पौधे रोपित कर दिए गए। ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ की टीम ने मौके पर मौजूद रहकर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। रिकॉर्ड पूरा होने के पश्चात महापौर वाराणसी, पीएमओ प्रभारी, मुख्य विकास अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में विश्व रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
जन-भागीदारी और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ का संदेश
इस ऐतिहासिक पल में जिला गंगा समिति चंदौली ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। जिला परियोजना अधिकारी दर्शन निषाद ने स्वयंसेवकों के साथ श्रमदान करते हुए पौधे लगाए। उन्होंने कहा:
“यह कार्य ऐतिहासिक है। जब यह जंगल अपनी युवा अवस्था में आएगा, तो वन्यजीवों और जैव विविधता का बड़ा केंद्र बनेगा। यह आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री के आह्वान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ लगाने का संदेश भी जन-जन तक पहुँचाया।
मुख्य आकर्षण:
क्षेत्रफल: 350 बीघा जमीन।
सहभागिता: 20 हजार से अधिक नागरिक, स्वयंसेवक और अधिकारी।
तकनीक: मियावाकी पद्धति (जो कम समय में सघन वन बनाने में सहायक है)।
उपलब्धि: चीन को पछाड़कर भारत अब एक घंटे में सर्वाधिक पौधरोपण करने वाला दुनिया का नंबर-1 देश बना।
इस कार्यक्रम ने न केवल वाराणसी का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त संदेश भी दिया है।