लखनऊ। सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाने वाला नागपंचमी पर्व मंगलवार को राजधानी लखनऊ सहित पूरे उत्तर भारत में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। प्राचीन नाग मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। महिलाओं और बच्चों ने विशेष रूप से व्रत रखकर नाग देवता की पूजा की।
प्रमुख मंदिरों में रहा विशेष आयोजन
लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर, चंद्रिका देवी मंदिर, कालीजी मंदिर (राजाजीपुरम) और काकोरी के नाग मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में विशेष पूजन, दुग्धाभिषेक और आरती का आयोजन हुआ।
पारंपरिक आस्था के प्रतीक
मान्यता है कि नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से सर्पदोष से मुक्ति, स्वास्थ्य की रक्षा और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन लोग घरों में दीवारों पर नाग का चित्र बनाते हैं और दूध, लड्डू, पुष्प, दूर्वा आदि अर्पित करते हैं।
सांप पकड़ने पर रोक
वन विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सांपों को पकड़कर उनका प्रदर्शन करना कानूनन अपराध है। नागपंचमी पर किसी भी प्रकार की जानवरों की तस्करी या प्रताड़ना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पावन पर्व नाग पंचमी आज पूरे देशभर में श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और घरों में नाग देवता की पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने दूध, लड्डू, कुशा, दूर्वा और फूल चढ़ाकर नागों की पूजा की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस अवसर पर पारंपरिक धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ झांकियां भी निकाली गईं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई और भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
विशेषकर महिलाओं ने इस दिन व्रत रखकर नाग देवता की कथा सुनी और परिवार की रक्षा तथा संतान की लंबी उम्र की कामना की। कई जगहों पर मिट्टी से नाग देवता की मूर्ति बनाकर दूध, हल्दी, चावल और रोली से पूजा की गई।
पंडितों के अनुसार, नाग पंचमी पर पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और सर्प भय समाप्त होता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन नागों की पूजा करने से शिव जी भी प्रसन्न होते हैं क्योंकि वे सर्पों को अपने गले का हार मानते हैं।
इस मौके पर प्रशासन द्वारा मंदिर परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई थी। कई जगह सांपों की झांकी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ।