लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मदरसों में संचालित 58 मिनी आईटीआई केंद्रों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय की ओर से बजट जारी न किए जाने के कारण इन केंद्रों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बजट पर लगी रोक से जहां प्रशिक्षण गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं, वहीं यहां कार्यरत कर्मचारियों को भी गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मिनी आईटीआई केंद्रों में कुल 510 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें पिछले आठ महीनों से वेतन और एरियर का भुगतान नहीं हो सका है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार वेतन न मिलने से घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने शासन से जल्द से जल्द बजट जारी करने की मांग की है।
प्रदेश के मान्यता प्राप्त मदरसों में संचालित ये मिनी आईटीआई केंद्र छात्रों को विभिन्न ट्रेडों में व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। इस योजना की शुरुआत वर्ष 2004 में 140 मदरसों में की गई थी, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को रोजगारोन्मुखी शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाना था। वर्तमान में प्रदेश के 47 जिलों के 126 मदरसों में वोकेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जिससे हजारों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।
हालांकि बजट आवंटन न होने से प्रशिक्षण सामग्री की उपलब्धता, उपकरणों के रखरखाव और कर्मचारियों के मानदेय पर सीधा असर पड़ा है। यदि जल्द ही बजट जारी नहीं किया गया, तो इन मिनी आईटीआई केंद्रों के बंद होने की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
मिनी आईटीआई के बजट और संचालन को लेकर अंतिम निर्णय 10 फरवरी को प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में लिया जाना है। कर्मचारियों और छात्रों को इस बैठक से राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सभी की नजरें शासन के फैसले पर टिकी हुई हैं।