नई दिल्ली।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी को संसद में वित्त वर्ष 2026 का आम बजट पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट है। बजट भाषण खत्म होते ही अब आम जनता, व्यापारी वर्ग और उद्योग जगत की नजर इस बात पर टिकी है कि कौन-सी चीजें सस्ती होंगी और किन वस्तुओं पर जेब ढीली करनी पड़ेगी।
हर साल की तरह इस बार भी बजट में टैक्स, कस्टम ड्यूटी और सेस में किए गए बदलावों का सीधा असर रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर लग्ज़री सामान तक पर पड़ने वाला है।
स्वास्थ्य और दवाइयों को राहत की उम्मीद
बजट में हेल्थ सेक्टर को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने कई जीवनरक्षक दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर शुल्क में राहत देने का संकेत दिया है। इससे कैंसर, गंभीर बीमारियों और लंबे इलाज से जुड़ी दवाइयों की कीमतें आने वाले समय में कम हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिडिल क्लास और निम्न आय वर्ग को सीधा फायदा मिलेगा।
मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कुछ कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी में बदलाव किया है।
इसका असर:
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मोबाइल फोन
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टैबलेट
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टीवी और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स
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किचन अप्लायंसेज़
की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम कीमतें कंपनियों की रणनीति पर भी निर्भर करेंगी।
इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी पर फोकस
बजट 2026 में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। EV बैटरी, सोलर एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़े कुछ इनपुट्स पर राहत से:
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इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ
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सोलर पैनल
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ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स
लंबे समय में सस्ते हो सकते हैं। सरकार का मकसद साफ है—फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना।
विदेश यात्रा और पढ़ाई पर असर
विदेश यात्रा, विदेशी शिक्षा और मेडिकल ट्रीटमेंट से जुड़े खर्चों पर टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव का असर पड़ेगा। इससे:
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ओवरसीज टूर पैकेज
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विदेशी यूनिवर्सिटी फीस
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विदेश में इलाज
कराने वालों को कुछ मामलों में राहत मिल सकती है, जबकि कुछ खर्च पहले से ज्यादा भी हो सकते हैं।
क्या हो सकता है महंगा?
शराब और तंबाकू उत्पाद
सरकार ने स्वास्थ्य कारणों को ध्यान में रखते हुए शराब, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का रुख दिखाया है।
इसका मतलब साफ है—
👉 शराब और सिगरेट पीना अब और महंगा हो सकता है।
लग्ज़री और आयातित सामान
लग्ज़री सेगमेंट पर सरकार का फोकस टैक्स बढ़ाने का रहा है। इसमें शामिल हो सकते हैं:
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महंगी घड़ियाँ
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लग्ज़री कारें
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प्रीमियम आयातित गैजेट्स
इन पर बढ़े शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर पड़ सकता है।
निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े खर्च
शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए कुछ टैक्स बदलाव किए गए हैं। खासतौर पर:
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फ्यूचर्स और ऑप्शंस
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शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग
से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे छोटे ट्रेडर्स पर असर पड़ने की संभावना है।
आम आदमी के लिए बजट का कुल असर
राहत वाले सेक्टर:
✔ स्वास्थ्य
✔ इलेक्ट्रॉनिक्स
✔ ग्रीन एनर्जी
✔ EV और टेक्नोलॉजी
महंगाई का असर:
❌ शराब-तंबाकू
❌ लग्ज़री आइटम
❌ कुछ निवेश गतिविधियाँ