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सिचाई बिभाग के अधिकारियो के लिए करोडो रुपये की लागत से आवास बना शोपीस

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चंदौली | चकिया तहसील के खेतों में इस समय सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदें भी सूखती नजर आ रही हैं।
सिंचाई व्यवस्था की बदहाली अब इतनी बढ़ चुकी है कि किसान सड़कों से लेकर दफ्तरों तक अपनी आवाज बुलंद करने को मजबूर हो गए हैं।
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त संघ के बैनर तले किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है।
उनका कहना है कि लिफ्ट सिंचाई कॉलोनियों में तैनात अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह बेपरवाह हो चुके हैं।
किसानों का आरोप है कि सहायक अभियंता और अवर अभियंता न तो नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहते हैं और न ही किसानों की समस्याओं को सुनने की कोई गंभीर कोशिश करते हैं।
नतीजा साफ है— नहरो की सफाई के नाम पर कोरमपुर्ती किसान आर्थिक संकट की ओर धकेले जा रहे हैं।
संघ के तहसील महामंत्री धीरज कुमार श्रीवास्तव ने तीखे शब्दों में सवाल उठाया,
“जब अधिकारी दफ्तर में ही नहीं मिलते, तो किसान अपनी समस्या लेकर आखिर जाएं तो कहां जाएं?”
उन्होंने मांग की कि सभी अधिकारी रोजाना कार्यालय में बैठकर शिकायतों की सुनवाई करें और मौके पर जाकर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।
मामले का एक और गंभीर पहलू भी सामने आया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने सरकारी आवास खाली पड़े हैं। किसानों का कहना है कि अधिकारी इन आवासों में रात्रि विश्राम तक नहीं करते, जिससे आपात स्थिति में भी कोई जिम्मेदार व्यक्ति उपलब्ध नहीं होता।
हालात की बड़ी तस्वीर:
चकिया क्षेत्र में सिंचाई बिभाग की लापरवाही से बिभिन्न स्थानो पर पानी अनावश्यक बहाया जा रहा है।
जिन योजनाओं से खेतों को पानी मिलना था, वे अब सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई हैं।
किसानों की चेतावनी:
किसानों ने प्रशासन को साफ शब्दों में चेताया है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।

यह सिर्फ चकिया का मुद्दा नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक ढांचे की हकीकत है जहां लापरवाही का सीधा असर खेत और किसान पर पड़ता है।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या समय रहते कदम उठाए जाएंगे, या फिर किसानों का गुस्सा सड़कों पर और तेज होगा।।

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