Edition

best news portal development company in india

जिला संवाददाता सुरेंद्र सिंह नागवंशी चकिया चन्दौली हाइटेक बेहतर शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण निजी स्कुलों की मनमानी पर उठ रहे सवाल

SHARE:

संवाददाता सुरेंद्र सिंह नागवंशी चकिया चन्दौली*

हाइटेक बेहतर शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण

निजी स्कुलों की मनमानी पर उठ रहे सवाल

चंदौली जनपद चंन्दौली में निजी (कन्वेंट) स्कूलों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि हाइटेक बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के नाम पर अभिभावकों से मनमानी वसूली की जा रही है। महंगी फीस के अलावा कॉपी-किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी स्कुल प्रबंधन द्वारा निजी या तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।
अभिभावकों की मजबूरी, स्कूलों की मनमानी
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि स्कुलों ने शिक्षा को व्यवसाय बना लिया है। बच्चों के भविष्य की चिंता में अभिभावक लाचार होकर महंगे दामों पर किताबें और ड्रेस खरीदने को विवश हैं। कई मामलों में बाजार से सस्ती सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों से ही खरीद अनिवार्य कर दी जाती है।
*हाइटेक शिक्षा या आर्थिक बोझ*
स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड और इंग्लिश मीडियम शिक्षा का हवाला देकर फीस और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि की जा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में इन सुविधाओं के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता भी दी जा रही है, या फिर यह सिर्फ अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का जरिया बन चुका है।
प्रशासन से शिकायत, कार्रवाई की मांग
जनपद के संभ्रांत नागरिकों और अभिभावकों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने मांग की है कि:
स्कूलों द्वारा अत्यधिक फीस के नाम पर मनमानी तय दुकानों से खरीद की अनिवार्यता खत्म की जाए
फीस और अन्य शुल्कों की जांच हो
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाए
नियम क्या कहते हैं?
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद कई स्कूल खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
अब देखना होगा…
अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर कितना संज्ञान लेते हैं और अभिभावकों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
चंदौली में शिक्षा के नाम पर बढ़ती व्यावसायिकता एक गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और अभिभावकों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।