ब्यूरो रिपोर्ट आइकानिक इंडिया न्यूज
विशेष सहयोगकर्ता- श्री रामजी मिश्र (संस्थापक P.S.A.S इन्टर कॉलेज)
खैराबाद/सीतापुर। किसी छोटे कस्बे की गलियों में पलने वाला कोई युवा जब बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बनाता है, तो उसकी सफलता केवल उसके परिवार की नहीं रहती, बल्कि उस मिट्टी, उस कस्बे और उन शिक्षण संस्थानों की भी उपलब्धि बन जाती है, जिन्होंने उसके व्यक्तित्व को गढ़ा होता है ।सीतापुर के ऐतिहासिक कस्बे खैराबाद के लिए ऐसा ही गौरव लेकर आए हैं शोभित श्रीवास्तव, जिन्होंने अभिनय की दुनिया में ‘शोभिनव सत्या’ के नाम से अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’ में शोभिनव सत्या ने नीम करौली बाबा की भूमिका निभाई है और इस किरदार के माध्यम से वह दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में सफल हुए हैं। फिल्म 2026 में रिलीज हुई और वर्तमान में भी चर्चा में है। लेकिन शोभिनव सत्या की यह पहचान एक दिन में नहीं बनी। इसके पीछे खैराबाद की गलियों से शुरू हुआ शिक्षा और संस्कारों का सफर, परिवार की मजबूत पृष्ठभूमि, वर्षों का प्रशिक्षण, मुंबई की भागदौड़ और अपने सपने के प्रति लगातार संघर्ष की लंबी कहानी है।
खैराबाद में पड़ी शिक्षा और संस्कारों की नींव:- शोभित श्रीवास्तव का खैराबाद से रिश्ता बेहद पुराना और गहरा है। उनकी माता वर्ष 2000 से 2008 तक पंडित सूर्यदत्त आनंदी सैगल इंटर कॉलेज, खैराबाद में शिक्षिका रहीं।
शोभित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, खैराबाद से ग्रहण की। उनके व्यक्तित्व निर्माण में विद्यालय के शिक्षकों और आचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विशेष रूप से आचार्य वीरेंद्र सिंह चौहान ने उन्हें लगभग चार वर्षों तक शिक्षा दी। श्री वीरेंद्र सिंह चौहान वर्तमान में पंडित सूर्यदत्त आनंदी सैगल इंटर कॉलेज, खैराबाद में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह शोभित के जीवन की शुरुआती पाठशाला केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खैराबाद के उस शैक्षिक और संस्कारवान वातावरण ने उनके व्यक्तित्व को दिशा दी, जहां शिक्षा के साथ अनुशासन और भारतीय संस्कारों को भी महत्व दिया जाता है।
लखनऊ से शुरू हुआ अभिनय का सफर: खैराबाद से प्रारंभिक शिक्षा के बाद शोभित ने आगे की शिक्षा Bright Land School, Lucknow से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने फैजाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी की। शिक्षा पूरी करने के साथ ही अभिनय के प्रति उनका आकर्षण और मजबूत होता गया। अपने इसी जुनून को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2016 में उन्होंने लखनऊ स्थित Opulent School of Acting and Films से अभिनय संबंधी डिप्लोमा किया। वहां उन्होंने लगभग एक वर्ष तक शिक्षण कार्य भी किया।
लेकिन मंजिल अभी दूर थी-: वर्ष 2018 में शोभित मुंबई चले गए, जहां उन्होंने फिल्म और अभिनय की दुनिया में अपने लिए जगह बनाने के संघर्ष की शुरुआत की। उन्होंने FTII, पुणे से शिक्षा ग्रहण की और इसके साथ-साथ लेखन, अभिनय तथा फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों में अनुभव हासिल किया। फिल्मी दुनिया में उन्होंने केवल अभिनेता बनने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जहां भी काम मिला, उसे सीखने और अनुभव हासिल करने का अवसर बनाया। पर्दे के सामने अभिनय से लेकर पर्दे के पीछे के काम तक उन्होंने सिनेमा को समझने की कोशिश की।
शोभित श्रीवास्तव से ‘शोभिनव सत्या’ तक: अभिनय की दुनिया में प्रवेश के बाद शोभित श्रीवास्तव ने अपना नाम ‘शोभिनव सत्या’ रखा। ‘शोभिनव’ उनके मूल नाम शोभित से लिया गया, जबकि ‘सत्या’ उनके पिता के नाम से जुड़ा हुआ है। इस तरह उनकी फिल्मी पहचान में भी उनके परिवार और उनकी जड़ों की छाप बनी रही। आज फिल्म जगत में उन्हें शोभिनव सत्या के नाम से जाना जाता है, लेकिन इस नाम के पीछे खैराबाद का वही शोभित श्रीवास्तव है, जिसने अपने सपनों की शुरुआत इसी कस्बे से की थी।
हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा का किरदार: शोभिनव सत्या के फिल्मी सफर में ‘हनुमान अंश’ एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर सामने आया है। फिल्म में उन्होंने नीम करौली बाबा का किरदार निभाया है। इस भूमिका तक पहुंचने की कहानी भी अपने आप में दिलचस्प है। शोभिनव फिल्म से जुड़े काम में शुरुआत से ही सक्रिय थे और उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर तथा प्रॉप्स से जुड़े काम भी किए। फिल्म के दौरान परिस्थितियां बदलीं और उन्हें नीम करौली बाबा की भूमिका निभाने का अवसर मिला। निर्देशक श्री विशाल चतुर्वेदी, जो स्वयं एमबीबीएस चिकित्सक हैं, ने उनके व्यक्तित्व और बाबा के युवा स्वरूप से उनकी समानता को महसूस किया। इसके बाद शोभिनव को इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना गया। हालिया बातचीत में शोभिनव ने इस अनुभव को अपने जीवन का बेहद विशेष अवसर बताया है।
आज फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया नीम करौली बाबा का किरदार उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
शिक्षा और संस्कारों से जुड़ा परिवार: शोभिनव सत्या के परिवार की पृष्ठभूमि भी शिक्षा और संस्कारों से जुड़ी रही है। उनके बाबा श्री किशोर चंद्र श्रीवास्तव डी.जे. इंटर कॉलेज, खैराबाद में शिक्षक रहे हैं। परिवार का मूल संबंध ग्राम बजेहरा, रामपुर, महमूदाबाद से है। खैराबाद के मोहल्ला कमाल सराय में उनके चाचा तथा परिवार का मकान है। वर्तमान में शोभिनव सत्या अपने माता-पिता के साथ लखनऊ के त्रिवेणी नगर फेज-3 में रह रहे हैं। परिवार शुरू से ही सात्विक और धार्मिक विचारधारा वाला रहा है। यही वजह है की उन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया।
खैराबाद और PSAS इंटर कॉलेज के लिए गर्व की बात: जहां उनकी माता ने वर्षों तक शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं और जहां उनके बाबा भी शिक्षक रहे—उसी खैराबाद से निकला यह युवा आज बड़े पर्दे पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है।
विशेष रूप से पंडित सूर्यदत्त आनंदी सैगल इंटर कॉलेज, खैराबाद के लिए यह गौरव का विषय है कि शिक्षा से जुड़े इस परिवार की अगली पीढ़ी का एक युवा आज फिल्म जगत में अपनी पहचान बना रहा है। खैराबाद की सभ्यता, शिक्षा और संस्कारों से निकला शोभित श्रीवास्तव आज ‘शोभिनव सत्या’ के रूप में बड़े पर्दे तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा के लिए शहर बड़ा होना जरूरी नहीं है। जरूरी है—सपना देखने की हिम्मत, उसे पाने का जुनून और रास्ते में आने वाली हर चुनौती से सीखने का जज्बा। खैराबाद ने शोभित को शिक्षा और संस्कार दिए, शोभित ने मेहनत से उन्हें अपनी ताकत बनाया और आज ‘हनुमान अंश’ के पर्दे पर शोभिनव सत्या के रूप में उनकी पहचान पूरे देश तक पहुंच रही है।
यह सिर्फ शोभित श्रीवास्तव की सफलता नहीं, खैराबाद की मिट्टी, उसके शिक्षकों और उसकी संस्कारवान परंपरा की भी सफलता है।
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