लखनऊ। जिला एवं सत्र न्यायालय, लखनऊ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए दहेज उत्पीड़न एवं संदिग्ध परिस्थितियों में पत्नी की मौत के मामले में आरोपी विश्वेंद्र कुमार सिंह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A, 304-B तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 एवं 4 के तहत लगाए गए आरोपों से आरोपी को बाइज्जत बरी कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला जानकीपुरम थाना क्षेत्र का है, जहां केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई) में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत वर्षा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। घटना के पश्चात मृतका के परिजनों ने पति विश्वेंद्र कुमार सिंह एवं उनके परिजनों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में जानकीपुरम पुलिस द्वारा जांच कर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल, आशीष मिश्रा एवं सुमित यादव ने प्रभावी पैरवी करते हुए तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने हेतु कोई ठोस एवं प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है। प्रस्तुत साक्ष्यों एवं पुलिस जांच में कई विरोधाभास भी सामने आए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के उपरांत यह पाया कि आरोपी के विरुद्ध संदेह से परे कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल संदेह के आधार पर किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इसी आधार पर जिला एवं सत्र न्यायालय, लखनऊ ने आरोपी विश्वेंद्र कुमार सिंह को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी करने का आदेश पारित किया।
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