नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से 5 सितंबर 2026 को जारी प्रेस कम्युनिके के अनुसार राष्ट्रपति ने डॉ. दिनेश शर्मा की नियुक्ति को मंजूरी दी है। उनकी नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी, जिस दिन वह अपने कार्यालय का कार्यभार ग्रहण करेंगे।
डॉ. दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर काफी लंबा और महत्वपूर्ण रहा है। अकादमिक क्षेत्र से सार्वजनिक जीवन में आए शर्मा ने लखनऊ के महापौर से लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और फिर राज्यसभा सांसद तक की जिम्मेदारी संभाली। अब उन्हें केंद्र शासित प्रदेश अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कौन हैं डॉ. दिनेश शर्मा?
डॉ. दिनेश शर्मा का जन्म 12 जनवरी 1964 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वाणिज्य विषय में अध्ययन के बाद अकादमिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वह लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर भी रहे हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता में डॉक्टरेट भी शामिल है।
राजनीति में आने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण उनकी पहचान एक शिक्षाविद् के रूप में भी रही। बाद में छात्र राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए उन्होंने भाजपा की राजनीति में अपनी जगह बनाई।
एबीवीपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
डॉ. दिनेश शर्मा की राजनीतिक यात्रा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुई। इसके बाद वह भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े और संगठन में लगातार जिम्मेदारियां संभालते हुए आगे बढ़े।
वर्ष 1993 से 1998 के बीच वह भारतीय जनता युवा मोर्चा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रहे। संगठन में काम करते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर भाजपा के विस्तार और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उनकी संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक सक्रियता ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान आकर्षित किया। समय के साथ वह प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे।
लखनऊ के महापौर बने
डॉ. दिनेश शर्मा के राजनीतिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2006 में आया, जब वह लखनऊ के महापौर चुने गए। इसके बाद वर्ष 2012 में उन्होंने दोबारा महापौर का चुनाव जीता।
लखनऊ नगर निगम की राजनीति में लगातार दो कार्यकाल ने उन्हें राजधानी की राजनीति में एक मजबूत भाजपा नेता के रूप में स्थापित किया। वह करीब एक दशक तक लखनऊ के महापौर रहे और इसी दौरान उनकी पहचान प्रदेश भाजपा के प्रमुख नेताओं में बनने लगी।
लखनऊ की राजनीति में उनकी सक्रियता के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके राजनीतिक संबंधों का भी अक्सर उल्लेख किया गया। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के संगठनात्मक और चुनावी अभियान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात प्रभारी
वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद डॉ. दिनेश शर्मा को पार्टी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिली। 16 अगस्त 2014 को उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत की।
उन्हें गुजरात भाजपा के प्रभारी की जिम्मेदारी भी दी गई। संगठन के स्तर पर लगातार काम करने के कारण उनका कद भाजपा में बढ़ता गया।
2017 में बने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री
वर्ष 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव डॉ. दिनेश शर्मा के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। भाजपा को विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत मिलने के बाद 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इसी सरकार में डॉ. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इस तरह शर्मा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए।
सरकार में उन्हें माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी बने।
शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी के दौरान कई चुनौतियां
उपमुख्यमंत्री रहते हुए डॉ. दिनेश शर्मा के पास शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग रहे। उस दौरान उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं, नकल विरोधी अभियान, परीक्षा व्यवस्था, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसे मुद्दे सरकार के सामने प्रमुख चुनौतियां रहे।
शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी के कारण वह प्रदेश में शिक्षा नीति और परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सार्वजनिक चर्चा में रहे।
2022 में खत्म हुआ उपमुख्यमंत्री का कार्यकाल
वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा एक बार फिर सत्ता में लौटी और योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
हालांकि इस बार मंत्रिमंडल में डॉ. दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। उनकी जगह ब्रजेश पाठक को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इस तरह 25 मार्च 2022 को डॉ. दिनेश शर्मा का करीब पांच वर्ष लंबा उपमुख्यमंत्री कार्यकाल समाप्त हुआ।
सरकार से बाहर होने के बावजूद वह भाजपा संगठन और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे।
2023 में पहुंचे राज्यसभा
उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को वर्ष 2023 में भाजपा ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया। यह सीट भाजपा नेता हरद्वार दुबे के निधन के बाद खाली हुई थी। भाजपा ने शर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित किया और वह निर्विरोध राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।
18 सितंबर 2023 से उनका राज्यसभा कार्यकाल दर्ज है और वह उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा सांसद बने।
राज्यसभा में आने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखी। संसदीय गतिविधियों और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता बनी रही।
अब नई जिम्मेदारी—अंडमान एवं निकोबार के उपराज्यपाल
अब डॉ. दिनेश शर्मा के राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 5 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति ने उन्हें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया। राष्ट्रपति सचिवालय की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी।
उपराज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका पहले की राजनीतिक जिम्मेदारियों से अलग होगी। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह केंद्र शासित प्रदेश है और यहां उपराज्यपाल प्रशासन का संवैधानिक प्रमुख होता है।
इस नई जिम्मेदारी के साथ डॉ. शर्मा के सामने द्वीपसमूह के प्रशासन, विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में केंद्र सरकार की नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
शिक्षक से उपराज्यपाल तक का सफर
डॉ. दिनेश शर्मा का सफर कई मायनों में उल्लेखनीय है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत शिक्षा और छात्र संगठन से की। इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा में जिम्मेदारी संभाली, लखनऊ के महापौर बने, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने, राज्यसभा पहुंचे और अब उपराज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी तक पहुंचे हैं।
उनकी यात्रा को इस क्रम में देखा जा सकता है:
शिक्षाविद् → ABVP कार्यकर्ता → भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष → लखनऊ महापौर → भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष → उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री → राज्यसभा सांसद → अंडमान एवं निकोबार के उपराज्यपाल।
अंडमान-निकोबार के लिए नई जिम्मेदारी
डॉ. दिनेश शर्मा को ऐसे समय में यह जिम्मेदारी मिली है जब अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह रणनीतिक, पर्यटन और विकास की दृष्टि से लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
द्वीपसमूह की भौगोलिक स्थिति भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है। ऐसे में उपराज्यपाल के तौर पर डॉ. शर्मा की प्रशासनिक क्षमता, राजनीतिक अनुभव और केंद्र सरकार के साथ समन्वय महत्वपूर्ण माना जाएगा।
राजनीतिक अनुभव आएगा काम
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सरकार में पांच वर्ष से अधिक समय तक उपमुख्यमंत्री रहने का अनुभव डॉ. शर्मा के लिए इस नई जिम्मेदारी में उपयोगी हो सकता है। शिक्षा, तकनीक, प्रशासन और संगठन के क्षेत्र में काम करने के साथ उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का भी अनुभव है।
राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने केंद्र की राजनीति को करीब से समझा है। अब केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल के रूप में उन्हें प्रशासनिक और संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा।
डॉ. दिनेश शर्मा की राजनीतिक यात्रा लखनऊ की स्थानीय राजनीति से निकलकर उत्तर प्रदेश सरकार और फिर संसद तक पहुंची। अब राष्ट्रपति द्वारा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के साथ उनके सार्वजनिक जीवन में एक नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जुड़ गई है।
5 सितंबर 2026 का यह निर्णय उनके राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
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